आंध्र प्रदेश में वक्फ बोर्ड भंग, चंद्रबाबू नायडू सरकार का बड़ा प्रशासनिक फैसला

आंध्र प्रदेश में मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने राज्य वक्फ बोर्ड को भंग कर दिया है। जानें इस फैसले के पीछे की वजह, सरकार की प्रतिबद्धता और विपक्षी पार्टियों की प्रतिक्रिया।

Dec 01, 2024 - 15:23
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आंध्र प्रदेश में वक्फ बोर्ड भंग, चंद्रबाबू नायडू सरकार का बड़ा प्रशासनिक फैसला

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए राज्य वक्फ बोर्ड को भंग कर दिया है। सरकार ने एक आधिकारिक आदेश (जीओ-75) जारी कर यह निर्णय लिया। वक्फ बोर्ड, जो पिछली वाईएसआरसीपी सरकार के दौरान गठित किया गया था, को अब भंग कर दिया गया है।

वक्फ बोर्ड भंग करने का कारण

सरकार ने 2023 में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा जारी जीओ-47 को रद्द करते हुए यह कदम उठाया। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली सरकार ने कहा कि हाईकोर्ट ने वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के चुनाव पर रोक लगा दी थी, जिससे बोर्ड के संचालन में एक शून्यता पैदा हो गई थी।

आदेश में लिखा गया है:
"अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, आंध्र प्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड के गठन के लिए जारी G.O.Ms.No.47 को वापस लेता है।"

सरकार का कहना है कि यह फैसला वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और अल्पसंख्यक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए लिया गया है।

मंत्री मोहम्मद फारूक का बयान

कानून एवं न्याय और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री एन मोहम्मद फारूक ने स्पष्ट किया कि जीओ-75 का मुख्य उद्देश्य वक्फ बोर्ड में शासन संबंधी शून्यता को समाप्त करना है। उन्होंने कहा, "सरकार वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और अल्पसंख्यकों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।"

विपक्ष और बीजेपी का रुख

आंध्र प्रदेश बीजेपी के उपाध्यक्ष विष्णु वर्धन रेड्डी ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि "धर्मनिरपेक्ष भारत में वक्फ बोर्ड जैसी संस्थाओं के लिए संवैधानिक प्रावधानों की कमी है।"

बीजेपी नेता अमित मालवीय ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, "आंध्र प्रदेश सरकार ने वक्फ बोर्ड को खत्म कर दिया है। संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो धर्मनिरपेक्ष भारत में ऐसी संस्थाओं के अस्तित्व का समर्थन करता हो।"

एनडीए सरकार का गठन और चुनावी पृष्ठभूमि

आंध्र प्रदेश में मई 2024 में हुए विधानसभा चुनावों में एनडीए गठबंधन ने प्रचंड जीत दर्ज की। कुल 175 सीटों में से चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी ने 135 सीटें जीतीं। सहयोगी जनसेना पार्टी को 21 और बीजेपी को 8 सीटों पर जीत मिली। इसके बाद चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में सरकार का गठन हुआ और पवन कल्याण को डिप्टी सीएम बनाया गया।

यह फैसला एनडीए सरकार की प्रशासनिक रणनीति और अल्पसंख्यक कल्याण के प्रति उनकी नीतियों को दर्शाता है। अब देखना होगा कि इस फैसले का राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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